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पुरूस्कारी गुर्गा पुरूस्कार बँटा डकैत (हास्य कटाक्ष)

बाबा बड़बड़ाइत रहै घिना गेल मिथिला मैथिली. इ मैथिल डकैत आ गुर्गा सब पुरूस्कारी खेल मे त चंबलो घाटी डकैत के कान काटि लेत की? एकरा सबके कोनो लाज धाख छै आ कोन झड़कलहा के पुरूस्कारी धूर्तै के लाज छै? किताब बिकाइ छै नैहे लोक पढ़लकै नैहे आ वरिष्ठ साहित्यकार हेबाक दाबिए चूर रहैए ई डकैत सब. मनमाना पर उतारू यै जे हमरा के की कए लेत? वास्तव मे मिथिला समाजक लोक सब सेहो चोरनुकबा यै त अई डकैत सबके मनमाना के रोकत? के मंगतै जवाब, केकरा माने मतलब छै?

हम बजली हौ बाबा भिंसरे भिंसरे की हो गेलहो? घर मे डकैती हो गेलौ? की कोइ भांग खुआए देलकहो जे बाबा तोंई एना बड़बड़ाए रहलौ? पुरस्कार त गेल जाइ हइ ओकरो कहूँ डकैति होलैइए? हमर गप सुन बाबा हां हां के हँसे लगले आ बोललकै हौ कारीगर तोरा सबटा यथार्थ बुझल छह आ यथार्थवादी लेखन माध्यमे लोक के पुरूस्कारी धूर्तै के देखार चिन्हाक कए दै छहक? आ अखैन अनठिया के हमरे स पुछै छह आ हमरे स सुनै चाहै छह? हम बोलली यौ बाबा हम कोनो चोर डकैत के गिरोह मे रहै छी की? हमरा पुरूस्कारी चोरी डकैती बारे मे कुछो ने बुझल है क? बलू अहीं साफ साफ कहू जे पुरूस्कारी डकैती की हइ?

बाबा बोललकै देखै नै छहक जे मैथिली साहित्यकार सब चोर डकैत जेंका अपन गिरोह बनेने अछि. जेहेन गिरोह तेहेन पुरूस्कार बँटा डकैत आ तेहने पुरूस्कारी गुर्गा सब. ई सब तेना हो हो करतह जे एकरे सब दुआरे मिथिला मैथिली बांचल होउ? आ एहि धूर्तै मे इ सब मिथिला मैथिली के अपन बपौती बुझि कब्जा जमौने रहल. कतेक नाम गनबिअह? साहित्य अकादमी, मैथिली भोजपुरी अकादमी, मिथिला मैथिली समिति, लेखक संघ, परिषद कतेको एहेन गिरोह आ तेक्कर गुर्गा सब मिली मैथिली पुरस्कारक डकैति मे लागल यै की? यथार्थ कहबहक त डकैत आ गुर्गा सब बतकुट्टबैल क अप्पन चलकपनी कुकृत्य के झँपै के फिराक मे रहतह. मैथिली पुरस्कार मे कोनो निष्पक्ष व्यवस्था कतौ नै भेटतह? जेहेन गिरोह आ जेहेन गुर्गा तेहने पुरस्कार बँटा डकैती. अहि दुआरे त मैथिली पुरस्कार सब महत्वहीन भ गेलै आ घिना के राखि दै जाइ गेलै. यथार्थ कहक त उनटे हमरे तोरे कुंठित कहि चलकपनी करतह. उ डकैत गुर्गा सब अपने कतेक कुंठित अछि जे निष्पक्ष व्यवस्था के बात पर कपरफोरी पर उतारू भऽ जेतह की?

हम बाबा स पुछली जे पुरूस्कार देलकै आ भेटलै त अइ मे पुरूस्कारी डकैत आ गुर्गा कैसने हो गेलै? बाबा हां हां के बोलै लगलै हौ कारीगर तहूँ सबटा हमरे मुँहे अइ पुरूस्कार बँटा डकैत सबहक देखार चिन्हार करेबह त हैइए लैह सुनहअ सबटा किरदानी. एकटा गप कहअ हमर तोहर यथार्थवादी बिचार मिलै छह आ अपना सब त कोनो गिरोहो मे नै रहै छि. तइयो हम तोरा बसहा बरद पुरूस्कार द दियअ आ तूं हमरा मिथिलांचल टुडे पत्रकारित पुरूस्कार बाँटि दैए त इ पुरस्कारी डकैति भेलै की नै? चिन्हा परिचे, सर कुटमारी, हिरोहबादी होहकारी, संयोजकीय जोगारी बले मैथिली पुरूस्कार लूट मचल छै आ उनटे अनका उपदेश जे झरकल मुँह झपनै नीक त अइ डकैत सबके अपन किरदानी किए नै देखै छै. एकरो सब लेल कहबी बनतै ने पुरूस्कारी डकैत के अपकरमी मुँह उघारे नीक. पुरस्कारी डकैत सब नैह तन निष्पक्ष व्यवस्था बेर हरहड़ी बज्जर खैस परै छैन्ह की?

लेखक:- डाॅ. किशन कारीगर
(©काॅपीराईट)

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कवि परिचय:- किशन कारीगर ( मूल नाम- डाॅ. कृष्ण कुमार राय). जन्म:- 5 मार्च 1983ई.(कलकता मे)। शिक्षाः- पीएच.डी(शिक्षाशात्र), एमएमसी(मास कम्युनिकेशन),एम्.एड,बी.एड, पि.जी.डिप्लोमा(रेडियो प्रसारण) । मैथिली/हिंदी/ बांग्ला मे किशन कारीगर उपनाम से…

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