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” परिवर्तन “

डॉ लक्ष्मण झा”परिमल ”
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ओझरा गेल रही
भसिया गेल रही
मोतिया बिन्दक
पाथर आँखि मे
अपन डेरा जमा
देने रहय
जाड़क कुहासा
सं पथ सेहो नहि
देखा रहल छल
केहुना टूघरि टूघरि
थाहेत थाहेत
घुस्कूनिया काटी
रहल छलहूँ
मुदा शिथिलता बोझिलता
आ थकान
ललाट पर नहि आबी सकल
अद्भुत एक ज्योतिपुंज
आँखि सं टकरा गेल
ओ अपन पथ बनबैत
ह्रदय मे घूसिया गेल
दिव्य दृष्टि आबि गेल
पथ आलोकिक भ गेल
पड़ा गेल कुहासा
दिनकरक तेज जखन तेज भेल !!
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डॉ लक्ष्मण झा”परिमल ”
साउंड हेल्थ क्लिनिक
डॉक्टर’स लेन
दुमका
झारखण्ड

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