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द्वीटा मुक्तक देखू

द्वीटा मुक्तक देखू

बहि रहल आँखि सँ देखू झरना।
हाल कहू नै कोना छी सजना?
शीत पसरल य रौदि रुसल य!
हम निपै छी नोर सँ अंगना।

हाल बुझै छी हम तोहर सजनी।
अपने मन सँ गेलेँ नैहर सजनी।
देख पुलकित य मौसमक ममहर।
शीत पसरल य हृदय तर सजनी।

दीपक झा “रुद्रा”

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Author
नाम दीपक कुमार झा उपाधि रुद्र (गुरुदेव श्री द्वारा प्राप्त) साहित्यिक नाम दीपक झा "रुद्रा" जन्म 29/08/1998 मधुबनी ,बिहार पूर्व छात्र नेता बिहार बहुतकनिकी छात्र संघ अध्यक्ष , पत्रकार और…

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