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छठ

छठ
प्रकृति से लगाव के परब हैय।
लोगों के आस्था के व्रत हैय।
समाज के एकजुटता के परब हैय।
गांव के पुर्नजीविता के परब हैय।

छठ
सूर्य आ जल के महत्ता के परब हैय।
सौर ऊर्जा आ जल ऊर्जा के परब हैय।
नदी आ तालाब के सौंदर्य के परब हैय।
विनाशकारी भूकंम्प से बचाबे लेल परब हैय।

छठ
आइ सूर्य के मूर्ति के पूजा हो रहल हैय।
खुले आकाश में डुबते-उगते सूर्य के पूजा नैय।
बंद मंदिर में सात घोड़े से जुड़े रथ पे सूर्य हैय।
भक्त नै, पुजारी सूर्य भगवान के पूजैय हैय।

छठ
नदी आ तालाब के तट पर परब नैय।
भवन के छत पर प्लास्टिक नाद में पूजा हैय।
मतारी के अंचरा पर नटुआ के नाच नैय।
डीजे के धुन पर पाप आ डांस हैय।

छठ
आइ आस्था विश्वास के परब नैय।
आइ अंध विश्वास के मेला हैय।
आइ प्रकृति के उपासना आराधना नैय।
आइ रामा सूर्य के केवल अंध पूजा हैय।

स्वरचित © सर्वाधिकार रचनाकाराधीन।

-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी।

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मैथिली और हिन्दी कविता कहानी लेखन

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