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गुलाम

हम कैइसे गुलाम छी!
कहियो हम मुगल के गुलाम छी।
कहियो हम अंग्रेज के गुलाम छी।
कहियो हम राजा के गुलाम छी।

हम कैइसे गुलाम छी।
आइयो हम नेता के गुलाम छी।
आइयो हम पार्टी के गुलाम छी।
आइयो हम राजनीति के गुलाम छी।

हम कैइसे गुलाम छी।
आइयो हम जाति के गुलाम छी।
आइयो हम समाज के गुलाम छी।
आइयो हम अर्थ के गुलाम छी।

हम कैइसे गुलाम छी।
आइयो हम धरम के गुलाम छी।
आइयो हम राजवंशी भगवान के गुलाम छी।
आइयो रामा हम राजा के गुलाम छी।

स्वरचित © सर्वाधिकार रचनाकाराधीन।

-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी।

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मैथिली और हिन्दी कविता कहानी लेखन

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