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” एकरे कहल जाइत अछि …. .शालीनताक आभाव “

डॉ लक्ष्मण झा” परिमल ”
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कखनो -कखनो संवादक भंगिमा देखि हम क्षुब्ध भऽ जाइत छी ! अखने फेस बुक मे शामिल भेलहूँ आ फुदक’ लगलहूँ ..कखनहूँ मैसेंजर मे ..’हाय’ ..केहन छी ?…की कऽ रहल छी ?…कखनहूँ व्हात्साप मे घुसि जेताह ..आ पता नहि ..कतो-कतो सं मंगलाहा पोस्ट कें पठ्वैत रहता ..कोनो -कोनो पोस्ट मे आग्रह सेहो रहत ” कृपया इसे १००० मित्रों को पोस्ट करें ..आपको अभूत पूर्व लाभ होगा ” …. ताहि लेल कहियो तकर जबाब नहि देबाक मन भेल ! कियाक त भाषा मे शिष्टाचारक समावेश कखनहूँ नहि भेटल ! ..प्रश्न ऐना नहि पूछल जाइत छैक ..सर्वप्रथम अभिवादनक महत्व होइत छैक ..नमस्कार ..प्रणाम …अभिनन्दन…तकर बादे कोनो गप्प !..रामायण मे ….लक्ष्मण जी महापंडित रावणक चरण दिश पहुंचि शिक्षा ग्रहण करैत छथि ! …..एकरे कहल जाइत अछि ……..शालीनताक आभाव !
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“हम इ नहि देखबनि
के हमरा सं श्रेष्ठ छथि
के हमरा सं पैघ छथि !
किनका सम्मान सूचक ‘श्रीमान’ कही !!
कियाक त फेस बुक मे सब मित्रे छथि ,
रहल सहल भूल चूक
हम नहि सुधारि सकैत छी !”
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आब एहि विषय पर हमरा लोकनि कें भलीभांति सोचय पडत !
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डॉ लक्ष्मण झा” परिमल ”
साउंड हेल्थ क्लिनिक
डॉक्टर’स लेन
दुमका
झारखण्ड

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