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असहमति

असहमति
आइ कि हो रहल हैय।
असहमति के अधिकार
छीनल जा रहल हैय।

आइ कि हो रहल हैय।
अभिव्यक्ति के अधिकार
छीनल जा रहल हैय।

आइ कि हो रहल हैय।
असहमति के अधिकार
देशद्रोह बन रहल हैय।

आइ कि हो रहल हैय।
अमीरी गरीबी के खाई
बढल जा रहल हैय।

आइ कि हो रहल हैय।
बेरोज़गारी सुरसा के मुंह लेखा
बढल जा रहल हैय।

आइ कि हो रहल हैय।
मंहगाई दिन दुना राति चौगुना
बढल जा रहल हैय।

आइ कि हो रहल हैय।
सत्ता के लगभगुआ
देशभक्त कहल जा रहल हैय।

आइ कि हो रहल हैय।
देशभक्ति के परिभाषा
रामा नया बन रहल हैय।

स्वरचित © सर्वाधिकार रचनाकाराधीन।

-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी।

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मैथिली और हिन्दी कविता कहानी लेखन

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