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“अपना बरद कें हम कुरहरिये सं नाथब “

डॉ लक्ष्मण झा “परिमल ”
( मैथिली भाषा )
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तर्क आ विचारक स्वतंत्रता हमर जन्मसिद्ध अधिकार अछि ! परंच तकर आलोचना आ प्रशंसा नहि हैत से कथमपि सम्भव् नहि ! हम मैथिल छी ,मैथिली बजैत छी आ मिथिला मे रहैत छी ! पृथक मिथिला राज्यक आन्दोलनक सूत्रधार बनलहूँ ! ग्राम -ग्राम ,देश -देश मे घूमि-घूमि मैथिल कें जागृत केलहूँ ! एहि क्रम मे हम मिथिलांचल ,विभिन्य राज्य आ विदेशो मे अपना कें संगठित केलहुं ! विद्यापति समारोह ,मैथिली कवि संगोष्ठी आ विचार विमर्श यदा कदा करैत छी ! एहि आन्दोलनक मध्य हमर भाषा ‘मैथिली ‘ हमरा लोकनि मे प्राणक संचार करैत अछि ! मुदा हम अपन व्यक्तित्व दोसरो रूप बना लेने छी ! घर मे धिया -पूता लोकनि सं हिंदी बजैत छी ! हमर धिया -पूता छथि ! अपना बरद कें हम कुरहरिये सं नाथब ताहि लेल आहांकें कियाक क्षोभ होइत अछि ?
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डॉ लक्ष्मण झा “परिमल ”
एस० पी ० कॉलेज रोड
शिव पहाड़
दुमका
झारखण्ड
भारत

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