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11 Apr 2023 · 1 min read

Kabhi kabhi hum

Kabhi kabhi hum
Wakt par sub
Khuch chhod dete h.
Bharosa itna gahra
Kar lete hai
Ki jhakham utne hi
Gahre bante jata h.
Kinare tak pahuchana
Sabhi chahte hai.
Lekin bharosa khud par na karke,
Hum dusro ko kimati bana dete hai.

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