Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Apr 2023 · 1 min read

Iss chand ke diwane to sbhi hote hai

Iss chand ke diwane to sbhi hote hai
Mashuka ki khubsurati ka pradarshan sabhi krte hai
Sachha ishk parde uthane me nhi , parde bachane me hota hai
din ke ujale ke diwane kam , rat ki andheri ke diwane to sbhi hi hai.

1 Like · 209 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
वैष्णों भोजन खाइए,
वैष्णों भोजन खाइए,
Satish Srijan
मिलन
मिलन
Anamika Singh
देता है अच्छा सबक़,
देता है अच्छा सबक़,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मैं जी रहीं हूँ, क्योंकि अभी चंद साँसे शेष है।
मैं जी रहीं हूँ, क्योंकि अभी चंद साँसे शेष है।
लक्ष्मी सिंह
योग क्या है.?
योग क्या है.?
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
बाल एवं हास्य कविता: मुर्गा टीवी लाया है।
बाल एवं हास्य कविता: मुर्गा टीवी लाया है।
Rajesh Kumar Arjun
श्री राम राज्याभिषेक
श्री राम राज्याभिषेक
नवीन जोशी 'नवल'
दंगा पीड़ित कविता
दंगा पीड़ित कविता
Shyam Pandey
राजस्थान की पहचान
राजस्थान की पहचान
Shekhar Chandra Mitra
हम भी जिंदगी भर उम्मीदों के साए में चलें,
हम भी जिंदगी भर उम्मीदों के साए में चलें,
manjula chauhan
हिंदी दोहा -रथ
हिंदी दोहा -रथ
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
कर्मयोगी
कर्मयोगी
Aman Kumar Holy
"हास्य व्यंग्य"
Radhakishan R. Mundhra
एक मुद्दत से।
एक मुद्दत से।
Taj Mohammad
शिक्षित बेटियां मजबूत समाज
शिक्षित बेटियां मजबूत समाज
श्याम सिंह बिष्ट
दोस्ती अच्छी हो तो रंग लाती है
दोस्ती अच्छी हो तो रंग लाती है
Swati
जय जगजननी ! मातु भवानी(भगवती गीत)
जय जगजननी ! मातु भवानी(भगवती गीत)
मनोज कर्ण
Book of the day: मालव (उपन्यास)
Book of the day: मालव (उपन्यास)
Sahityapedia
गाँव बदलकर शहर हो रहा
गाँव बदलकर शहर हो रहा
रवि शंकर साह
मैं उनके मंदिर गया था / MUSAFIR BAITHA
मैं उनके मंदिर गया था / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
घबरा के छोड़ दें
घबरा के छोड़ दें
Dr fauzia Naseem shad
" अधूरा फेसबूक प्रोफाइल "
DrLakshman Jha Parimal
✍️✍️कश्मकश✍️✍️
✍️✍️कश्मकश✍️✍️
'अशांत' शेखर
कोई पूछे तो
कोई पूछे तो
Surinder blackpen
डर
डर
Sushil chauhan
*एक कवि-गोष्ठी यह भी  (हास्य कुंडलिया)*
*एक कवि-गोष्ठी यह भी (हास्य कुंडलिया)*
Ravi Prakash
मन के झरोखों में छिपा के रखा है,
मन के झरोखों में छिपा के रखा है,
अमित मिश्र
उलझनें
उलझनें
Shashi kala vyas
■ आज का सवाल...
■ आज का सवाल...
*Author प्रणय प्रभात*
एक पाती पितरों के नाम
एक पाती पितरों के नाम
Ram Krishan Rastogi
Loading...