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हिंसा

कहीं पर आग की लपटें, कहीं पर खून का कतरा ।
वफ़ा कब तक निभाओगे, बताकर देश पर खतरा।।

चुनावी लाभ लेने की, रहेगी आपकी फ़ितरत ।
गरीबों को लड़ाने की, रहेगी आपकी हसरत ।।

भला किंचित नहीं होगा, बढ़ेगी आपसी दूरी ।
घटेगी राष्ट्र की ताकत, बढ़ेगी और मजबूरी ।।

तुम्हारी स्वार्थ की नीयत, तुम्हारे रंग हैं खूनी ।
कभी घायल हुए रक्षक, कभी हिंसा बड़ी दूनी ।।

बहुत मजबूर है जनता, इसे ना और तड़पाओ ।
यही है वोट की ताकत , इसे न और बिखराओ ।।

#bombay #tripura_हिंसा

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मेरा एक काव्य संग्रह "आस्था के मोती" सन 2020 में प्रकाशित हो चुका है जिसमें 85 छंदबद्ध रचनाएँ समाहित हैं। रुचियां-साहित्य लेखन, संगीत, गायन एवं अभिनय शैक्षिक योग्यता -बीएससी गणित…

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