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सोन चिरैया…

सोन चिरैया…
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एक अनमोल ख्वाब छुपाए बैठा था ,
देश मेरा भारत महान ।
बनेगा फिर से सोने की चिड़िया
ये मेरा नया हिन्दुस्तान ।

ईजी ऑफ डूइंग बिजनेस से ,
दौड़ेगी पटरी पर अर्थव्यवस्था ।
भारत के कस्बों और बाजारों में,
होगी कर की एक ही व्यवस्था।

जीएसटी से बदलेगा देश ,
यही है जीएसटी का सन्देश ।
मनमाना टैक्स अब होगा बंद,
टैक्स चोरियाँ होगी पाबंद ।

लेकिन हुआ क्या आगे पढ़िए _

अरमानों के बहते समंदर में ,
प्यासी नदी सूखी ही रह गई ।
सोने की चिड़ियां बन सका न देश जब ,
किस्मत रुठ सोन चिरैया बन गई ।

अकुलाती शर्मीली पंखों से ,
दूर गगन में उड़ान को रोई ।
नजर गड़ाए कहती केवल ,
मेरी उड़ान रोको न कोई ।

जीएसटी का भी हुआ यही हाल,
सोनचिरैया बन हुआ बेहाल ।
चोर व्यवसायी नजर नहीं आते ,
बिना पते के काम चलाते ।

ई वे बिल की तो धज्जियाँ उड़ गई ,
नकली बीजक बनती चल गई ।
असली का होता जब बुरा हाल ,
तो नकली होते मालामाल ।

निदान क्या है, आगे पढ़िये _

बिना जांच के निबंधन न दो ,
सुरक्षा राशि शर्त लगा दो ।
ई वे बिल पर जो माल मंगाये ,
दस हजार का ही कैप लगाए ।

कर चोरी पर जब लगाम लगेगा ,
कर संग्रह तब तीन गुना बढ़ेगा ।
डीजल,पेट्रोल न होगा तंगहाल ,
फिर से देश बनेगा खुशहाल ।

मौलिक एवं स्वरचित
सर्वाधिकार सुरक्षित
© ® मनोज कुमार कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि – १७ /१०/२०२१
मोबाइल न. – 8757227201

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मनोज कुमार "कर्ण" "क्यों नहीं मैं जान पाया,काल की मंथर गति ? क्यों नहीं मैं समझ पाया,साकार की अंतर्वृत्ति ? मोह अब कर लो किनारा,जिंदगी अब गायेगी । सत्य खातिर…

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