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सूरज अब उदास रह रहा है

सूरज अब उदास रह रहा है
आ गया जाड़ा कह रहा है।

गेंदा, डहेलिया खिलने लगे
शकरकंद ,बेर, मिलने लगे
साग खेतों में उगने लगे हैं
पीले सरसों झूमने लगे हैं

नहर में ठंड़ा पानी बह रहा है
आ गया जाड़ा कह रहा है

गर्म कपड़ों से बाजार जगमगाया
उन्हें देखकर मन डगमगाया
बड़ा आनंद पुवाल का बिछावन
रात में सुनना किस्से-कहानियां पावन

आऊं? ये शीतलहर कह रहा है
आ गया जाड़ा कह रहा है।

घना कोहरा पड़ने लगा है
पेड़ से पत्ता झड़ने लगा है
जीव दांत किटकिटाने लगे हैं
कुछ शीतनिद्रा में जाने लगे हैं

अब सुना हर जगह रहा है
आ गया जाड़ा कह रहा है।

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नूरफातिमा खातून" नूरी" सहायक अध्यापिका प्राथमिक विद्यालय हाता-3 ब्लाक-तमकुही जिला-कुशीनगर उत्तर प्रदेश पिता का नाम-श्रीअख्तर हुसैन माता का नाम-श्रीमती सबीहा खातून पति-श्री रियासत अली शौक-मुक्तक, छन्दमुक्त कविता लेखन विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं…

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