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श्री रामचंद्र जी पर 7 दोहे

श्री रामचंद्र जी पर 7 दोहे
// दिनेश एल० “जैहिंद”

( 7 दोहे आप सबों के समक्ष रामनवमी के उपलक्ष्य में श्री रामचंद्र जी को भेंट सहित )

जबहिं विश्नु इच्छा करे, तब धरे नर शरीर ।
उतरे.. धरा पर हँसते, .. हरने मानव पीर ।।

नर लीला करने चले, मन में सोच-विचार ।
रघुवंश में जन्म लिए, बनके… भाई चार ।।

विश्वामित्र के संग में, लिए…. ज्ञान भंडार ।
कुछ असुरों को मार के, किए… यज्ञ उद्दार ।।

सीता भी अति खुश हुई, राम के संग ब्याह ।
जन्म-जन्म की साध जो, खाली गई न चाह ।।

बाली का अन्त करके, निभाया.. मित्र धर्म ।
दिए राज सुग्रीव को, बताए……. राम मर्म ।।

बने मित्र हनुमान जो, मिला राम को छाँव ।
हनुमत के सहयोग से, भरे…. राम के घाव ।।

राम-रावन युद्ध हुआ, मिला जीत उपहार ।
सीय से दुबारा मिले, .. रावन को वो मार ।।

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दिनेश एल० “जैहिंद”
24. 03. 2018

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मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि…

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