· Reading time: 1 minute

शेरांवाली माँ

****** शेरांवाली माँ ******
***********************

शेरांवाली शेर सवार आई है
पीछे पीछे भक्त कतार आई है

पर्वत शिखर निवास मैया का
पहाड़ों से शीतल बयार आई हैं

सिर पर सुन्दर मुकुट जड़ा है
हाथ में ले कर तलवार आई है

दुखियों की सुनी पुकार माई ने
खुशियों भरी हुई बहार आई है

हलवा पुरी का भोग लगाएंगे
संगत माता के दरबार आई है

जागरण कर माँ को मनाएंगे
घर में खुशियाँ हजार आई है

मनसीरत मन से है पुकारता
नवरंग रौनक बेशुमार आई है
***********************
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

44 Views
Like
Author
सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन अध्यापक शौक ःःकविता लिखना,पढना भाषा ःःहिंदी अंग्रेजी पंजाबी हिन्दी साहित्यपीडिया साईट पर प्रथम रहना प्रतिलिपि…

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...