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“वीर जवान”

“वीर जवान”
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ऐ मेरे देश के, वीर जवानों,
तुम ये मानो , या ना मानों;
कोई , कितना भी इतराले;
तुम ही हो, सबके रखवाले;
तुझसे ही , सब शत्रु कांपा;
तुझे याद करे, ‘भारतमाता’
जब तुम , जागते हो रैन में;
रात सब सोते , तब चैन में;
तुम्हीं हो , सच्चे ‘हिंदुस्तानी’
प्रेम से कहलाते ,’बलिदानी’
भू रक्षा और जीवन सुरक्षा,
यही है , तेरी पहली कसम;
झुकाये तू,प्रकृति व मौसम;
परिश्रम में तुम,सबसे आगे;
तुझे देख ही,सब भय भागे;
आतंक का, तुम हो दुश्मन;
देश समर्पित है,तेरा जीवन;
देश की लाज है,तेरे बल में;
चाहे; नभ , जल या थल में,
हे! ‘भारत’ के , सच्चे सपूत;
धन्य है वो,जिनके तुम पूत।
*********🙏*********

स्वरचित सह मौलिक
…..✍️पंकज ‘कर्ण’
…………कटिहार।।

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Author
"शिक्षक"... MA. (Hindi, Psychology & Education) B.Ed , LL.B (BHU),

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