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वायु प्रदूषण

बड़े शहरों में सांस लेना कठिन हो गया,
वायु प्रदूषित हो गई।
अति-विकास, अनियंत्रित निर्माण तथा,
अवैध उत्खनन ने भूमि उजाड़ दी
सारी रंगत खो गई।।
कारखानों का अरबों टन अपशिष्ट बहकर
समुंदर में घुल गया
कालिख जहर डुबो गई
वाहनों का जहरीला धुआं धू-धू करके
आकाश में भर गया
आग उगलने लगी पृथ्वी, प्रकृति देवी
आंसू भरकर रो गई।

जगदीश शर्मा सहज

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मेरा एक काव्य संग्रह "आस्था के मोती" सन 2020 में प्रकाशित हो चुका है जिसमें 85 छंदबद्ध रचनाएँ समाहित हैं। रुचियां-साहित्य लेखन, संगीत, गायन एवं अभिनय शैक्षिक योग्यता -बीएससी गणित…

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