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वह धन कहता है

वह सत्य कहता है
हे झूठ तेरे रुप हजार है
तुझसे चल रहा संसार है
तू कितने अपराध करेगा
तू कब तक
मुझे परेशान करेगा
तू कब तक मुझसे लुका – छिपी
का खेल खेलेगा
तू कब तक मुझसे दूर जाएगा।

वह धन कहता है
निर्धन से
हे प्रिय निर्धन जी
मैं हूँ धन
क्या तुम धनवान बनोगे
क्या तुम्हें विलासिता चाहिए
क्या तुम्हें —-?
झूठ का आत्मसात् करो
समय मत बर्बाद करो।

झूठ बोलो
अधर्म को आत्मसात् करो
पाप – पुण्य की मत करो परवाह
प्रमुख भ्रष्टाचारी से ले लो अच्छी सलाह।

तुम जितना झूठ बोलोगे
मैं उसके चार गुना में आऊँगी
मैं तुम्हें अमीर से और अमीर
बनाऊँगी।

राकेश कुमार राठौर
चाम्पा (छत्तीसगढ़)

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Author
नाम - राकेश कुमार राठौर पता - लायंस चौक चाम्पा जिला - जाँजगीर - चाम्पा (छत्तीसगढ़) रुचि - कविता लेखन, समकालीन घटनाओं को सामने लाना।

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