· Reading time: 1 minute

रांझे की हीर

रांझे की हीर

कल तक करते देखा था मुहब्बत कि खिलाफत जिनको।
आज शिद्दत से करते पाया एक रांझे कि वकालत उनको ।
ऐसा क्या हुआ, फिजा-ऐ-मिजाज़ ही बदल गया पल में ।
बन रांझे की हीर अच्छी लगने लगी जमाने कि जलालत उनको।।



डी. के. निवातिया

175 Views
Like
Author
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों,…

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...