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मेरी भी मधुशाला

चार मित्र जब मिलते है
तो जाते है वो मधुशाला
खो जाते है सब ग़म उनके
जब जाते है वो मधुशाला ।।

आज के युग में धन्य वही जो
जाता है रोज़ मधुशाला
पीता भी हो थोड़ा थोड़ा
साथी को ले जाए मधुशाला।।

पीनेवाले की बातें तो
हमेशा दिल से होती है
नहीं ज़रूरत परखने की
वो हरदम सच्ची होती है ।।

नहीं वो छीनते सुकून किसी का
उनको सुकून देती है मधुशाला
वो है मदमस्त हमेशा भोलाभाला
आंखें खुलती जब पहुंचे मधुशाला ।।

कलयुग में है धोका बहुत
है झूठ का भी गड़बड़झाला
कभी धोका ना देता पीने वाला
सच्चा है बस वो मतवाला ।।

पूरे होश में होता वो
जब पहुंचे वो मधुशाला
पग डगमग करते उसके
जब छोड़े वो मधुशाला
लगता ऐसा रोक रही हो
जाने से उसको मधुशाला ।।

सुरा चलामत से तृप्त वो हो जाता
ऐसे यज्ञ रोज़ कराती है मधुशाला
भाईचारा आज कहां दिखता जग में
देखना हो तो, आओ तुम भी मधुशाला ।।

दिल में है दर्द मगर मधुशाला
में जश्न मनाता वो पीनेवाला
दोनों हाथों को उठाकर कहता
आज ना मैं यहां से जानेवाला ।।

उठो मित्र अब ले जाओ इसको
बंद होने को आई अब मधुशाला
कहता है साकी रोज़ हमें जब मित्र
मध्यरात्रि में भी ना छोड़ें मधुशाला।।

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Author
कवि एवम विचारक

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