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मुक्तक (विधाता छन्द)

विनत होकर सहारा दे , बड़ा इंसान होता है |
रसीला वृक्ष फल देता, उसी का मान होता है ||
अकड़ में जो सदा रहता,कभी श्रद्धा नहीं पाता |
गठीला ठूँठ जंगल में खड़ा, वीरान होता है || (१)
—–*—— ——*—— —–*——-
किसी शुभ कार्य की पुरजोर, तैयारी करो पहले |
मृदुल व्यवहार के बल पर, सदाचारी करो पहले ||
निखरता है तभी जीवन तुम्हें,शुभकीर्ति मिलती है||
सफल इंसान से संवाद कर, यारी करो पहले || (२)

जगदीश शर्मा सहज

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मेरा एक काव्य संग्रह "आस्था के मोती" सन 2020 में प्रकाशित हो चुका है जिसमें 85 छंदबद्ध रचनाएँ समाहित हैं। रुचियां-साहित्य लेखन, संगीत, गायन एवं अभिनय शैक्षिक योग्यता -बीएससी गणित…

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