Read/Present your poetry in Sahityapedia Poetry Open Mic on 30 January 2022.

Register Now
· Reading time: 1 minute

प्यारी रजाई ( शीत ऋतु विशेष हास्य lकविता )

अरे ओ रजाई ,
जबसे तू हाथों में आई ।
तेरे आगोश में हमने सारी ,
दुनिया है भुलाई ।
इधर सर्दी का शबाब ,
उधर तेरा पुरसुकून साथ ,
वाह ! क्या लुत्फ है भाई !
ऐसे में गर कोई नींद से जगाए ,
उसे समझें हम कसाई ।
हां ! गर ऐसे में पिला दे बेड टी ,
उससे प्यारा जग में मीत नहीं कोई ।
मगर फिर भी तेरा संग न छूट पाए ,
बेड टी पीकर भी वापस आगोश ,
में बुलाए तू रजाई ।
अहा ,!! कितनी प्यारी नरम नरम
है तेरी गरमाई ।
तेरे पहलू में आकर ऐसा लगे ,
जैसे गोद में लेकर दुलार करे कोई माई ।
सारे संसार के सुख एक तरफ ,
एक तेरा साथ सारे सुखों पर भारी ।
तू धन्य है हे प्यारी रजाई !!

3 Likes · 8 Comments · 90 Views
Like
Author
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक…

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...