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धरा

*मुक्तक*
धधकती धरा धैर्य खोने लगी है।
हृदय से कटुक आज होने लगी है।
सहन कर्म कर अब मनुज के अनैतिक।
प्रकृति दंड देकर डुबोने लगी है।
अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’
रामपुर कलाँ,सबलगढ(म.प्र.)

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Author
कार्य- अध्ययन (स्नातकोत्तर) पता- रामपुर कलाँ,सबलगढ, जिला- मुरैना(म.प्र.)/ पिनकोड-476229 मो-08827040078

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