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तन्हा नहीं

गौर से देखना
कभी कोई तन्हा नहीं होता
चांद के साथ होती है
सदैव चांदनी
सूरज के साथ उसका प्रकाश
आसमान के साथ बादल तो
बादल के साथ उसका रंग
जमीन के संग माटी तो
माटी के साथ
उसके अंग में समाई उसकी
सौन्धी सौन्धी सुगन्ध
हवा के साथ धूल के कण
तन से मन
मन के साथ दर्पण
दर्पण में झांकती छवि
कभी अपनी कभी उसकी परछाई पर
एक दूसरे में समाहित
एक दूसरे में रचा बसा
एक दूसरे से बन्धा
एक दूसरे से जुड़ा
एक दूसरे से प्रकाशित
एक दूसरे से देदीप्यमान
एक दूसरे को अग्रसारित करता सब कुछ
न कोई किसी से दूर और
न ही कहीं कोई तन्हा।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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