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झूठ और चोर मौसेरे भाई

झूठ और चोर मौसेरे भाई है
झूठ सामने में बोला जाता है
एक झूठ छिपाने के लिए
हजार झूठ बोला जाता है
कभी स्वयं को
कभी सामने वाले के मन को
तौला जाता है।

चोर चोरी करता है
चोरी करते समय
आसपास को देखता है
कोई मुझे ——?
उस चोर को क्या मालूम
वह स्थान, वह समय
वह दिन, वह रात
उसे देख रहा है
फिर भी
वह भगवान को याद करता है
भगवान जी भी उसका साथ देतें हैं
वह चोरी करने में सफल हो जाता है।

वही भगवान जी मालिक का भी साथ देते हैं
एक दिन वह चोर पुलिस के गिरफ्त में आ जाता है
अपना गुनाह कबूल कर वह दण्ड का भागी बन जाता है।

आखिर झूठ और चोर को हारना पड़ता है
सत्य के सामने शीश झुकाना पड़ता है।

फिर भी वे दोनों आदत नही छोड़ते
दूसरे दिन से फिर उसी काम में लग जाते
बस उसी काम को करते हैं
क्यों कि झूठ और चोर मौसेरे भाई है
झूठ और चोर मौसेरे भाई है।।।

राकेश कुमार राठौर
चाम्पा (छत्तीसगढ़)

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Author
नाम - राकेश कुमार राठौर पता - लायंस चौक चाम्पा जिला - जाँजगीर - चाम्पा (छत्तीसगढ़) रुचि - कविता लेखन, समकालीन घटनाओं को सामने लाना।

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