· Reading time: 1 minute

जीना मुश्किल है

*जीना मुश्किल है (ग़ज़ल)*
**********************

जीना हिज्र में मुश्किल है,
पीना जहर भी मुश्किल है।

अब खूब घटनाएं घटती,
रहना शहर में मुश्किल है।

आंधी चली है जोरों पर,
पंछी शजर में मुश्किल है।

कटता नहीं पल-पल जग में,
मरना पहर में मुश्किल है।

खग हैं तरसते जलकण को,
पानी नहर में मुश्किल है।

गिरते कहीं नजरों से जो,
उठना नज़र में मुश्किल है।

गमगीन मनसीरत रोया,
मातम जिगर में मुश्किल है।
**********************
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

7 Views
Like
Author
सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन अध्यापक शौक ःःकविता लिखना,पढना भाषा ःःहिंदी अंग्रेजी पंजाबी हिन्दी साहित्यपीडिया साईट पर प्रथम रहना प्रतिलिपि…

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...