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जिद

मुक्तक /
उनकी जिद है कि इंसान को परेशां कर दें।
चौक-चौराहों को बदरंग कर कूड़ा भर दें ।।
बीज अलगाव के बोकर उगा दें कंटक।
देश के सीने में चुपचाप घोंप खंजर दें ।।

जगदीश शर्मा सहज

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मेरा एक काव्य संग्रह "आस्था के मोती" सन 2020 में प्रकाशित हो चुका है जिसमें 85 छंदबद्ध रचनाएँ समाहित हैं। रुचियां-साहित्य लेखन, संगीत, गायन एवं अभिनय शैक्षिक योग्यता -बीएससी गणित…

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