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छोड़ो चांद तारों को

धरती को धरती बने रहने दो
चांद को चांद पर ही रहने दो
क्या ज़रूरत है यहां चांद सितारों की
जो जहां है वहीं रहने दो।।

आ गया धरती पर चांद तो
सब उसे कहां निहार पाएंगे
केवल अपना ही मत सोचो
उसके बिना तारे कैसे रह पाएंगे।।

अपने प्यार के लिए दूसरों को
जुदा कैसे कर सकते हो तुम
सोचा है कभी, दर्द देकर किसी को
कैसे आबाद रह सकते हो तुम।।

मोहब्बत में चांद सितारों की नहीं
बस दिल में चाहत की ज़रूरत होती है
न मिले कुछ भी, लुट जाए सबकुछ
बस दिल में मोहब्बत की ज़रुरत होती है।।

छोड़ो अब चांद सितारों की बातें
करो बस तुम बस दिल की बातें
साथ होगा जो महबूब का अगर
जन्नत सी हसीं होगी हमारी बातें।।

होते हैं जब लोग मोहब्बत में
उन्हें चांद को देखने की फुरसत कहां
दिख जाए महबूब का चेहरा जब
दिखता है उनको तो चांद वहां।।

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Author
कवि एवम विचारक

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