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कुछ तो लोग कहेंगे

लोग क्या कहते हैं
क्या फर्क पड़ता है
सिर्फ चाह से कहां
फल यहां मिलता है।।

है वो खुद क्या कभी
इस बात पर गौर नहीं करते
हर वक्त दूसरों को ही
नसीहतों का है बस दम भरते।।

फिक्र करोगे अगर तुम
उनकी बातों की
नींद उड़ जायेगी तुम्हारी
फिर रातों की।।

कुछ कर नहीं पाओगे
जीवन में फिर तुम
जो डरते रह जाओगे
दूसरों की बातों से तुम।।

लोगों को तो माता सीता
में भी बुराई दिखी थी
उनकी ज़ुबान तो माता
सीता पर भी तीखी थी।।

जो बात करते है वो आसमां की
जमीं पर होते हैं उनके निशाने
बचना है तो ध्यान मत दो उनपर
तुम नहीं जानते उनके इशारे।।

तुम्हारा सुकून पसंद नहीं
है शायद उनको आज भी
तभी नुक्स निकाल रहे है
तुम्हारे जीवन में वो आज भी।।

जो खुद कुछ पा नहीं सकता
वही दूसरों में कमियां ढूंढता है
तसल्ली मिलती है उसको भी
जब उजालों में अंधेरा ढूंढता है।।

जो कुछ पाना चाहते हो
तुम कुछ जीवन में अपने
भूल जाओ उनको जो
पूरे न होने दे तुम्हारे सपने।।

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Author
कवि एवम विचारक

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