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कुछ खत मोहब्बत के

दिल आज भी मेरा तेरा हर पल इंतजार करता है, तुझे एक बार देखने के लिए मेरा दिल यूं ही आहे भरता है
मुझे नहीं पता अब तू मेरे बारे में क्या सोचता होगा
पर मैं सिर्फ तेरे बारे में ही सोचा करती हूं। आज जब फिर से तुझसे नजरें मिली
मेरे होठों पर एक मुस्कान है खिली, मेरे दिल में तेरे लिए सिर्फ प्यार ही प्यार है
जो रोज तुझे देखने के लिए होता बेकरार है
मुझे लगा कि आज फिर से तुझे अपना बना लूंगी, जो हुआ सब उसे भूल तुझे अपनी बाहों में बसा लूंगी, बुझते दिए को आज फिर अपने प्यार से जला लूंगी
पर तेरे चेहरे पर देख खामोशी मैं फिर से नाकाम रही
अब तुझसे इतनी गुजारिश है मेरी तू मेरे इस खत को मेरी मोहब्बत का आखिरी पैगाम समझना
मेरी हर शिकायत जिसकी मैंने पाई पाई जोड़ कर रखी, उसे तू मेरे प्यार में हुई ना समझी समझ मुझे माफ करना 🙏🙏😌😌
मेरी मोहब्बत का आखिरी पैगाम

Competition entry: "कुछ खत मोहब्बत के" - काव्य प्रतियोगिता
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