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कायस्थ✍️

कायस्थ✍️

एक जाति’कायस्थ’हैं,
वंशज, ‘चित्रगुप्त’ के;
विद्या, उनकी पूंजी है,
‘कलम’ उनकी शक्ति;
बारह हैं,’भ्राता’ इनके;
सब के सब हैं , प्यारे;
‘श्रीवास्तव’,’अस्थाना’
सुरजध्वज, ‘सक्सेना’
बाल्मीकि, ‘भटनागर’
निगम, कुलश्रेष्ठ,गौड़,
अम्बष्ठ, ‘कर्ण’ ‘माथुर’
हर क्षेत्र में, सब चतुर,
ये सबके , ‘भाग्य’ रचें,
निज बुद्धि, जग जचे;
जाति है ये,सम्मानित;
पूरा जग ये प्रमाणित;
निजकर्म को, ये मानें;
विधि विधान, ये जाने;
इनसे करे जो चतुराई,
उसके आगे है, ‘कुआं’
पीछे भी है, एक खाई;
ये रहते,मिलजुल कर;
मानें सबको निजभाई।
*****************
स्वरचित सह मौलिक;
……✍️पंकज ‘कर्ण’
………….कटिहार।।
तिथि:२३/१०/२०२१

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Author
"शिक्षक"... MA. (Hindi, Psychology & Education) B.Ed , LL.B (BHU),

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