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एक तरफा प्यार

जो मेरे साथ हुआ है
क्या तेरे साथ भी होता होगा
प्यार करता है जिससे तू
क्या वो भी प्यार किसी और से करता होगा।।

काश समझ पाता कभी तू भी
मेरे दिल में क्या होता होगा
जब वो देखता नहीं तेरी तरफ
तू भी तो मन ही मन रोता होगा।।

मौसम होता है बारिश का जब
तू भी तो मेरी तरह तरसता होगा
तड़पता तो होगा तू भी
जब वो किसी और से
मिलने जाता होगा।।

पड़े उसकी नजरें भी तुमपर
तू भी तो ये चाहता होगा
बुरा तो लगता होगा तुमको भी
जब वो किसी और की
आंखों में आंखें डालता होगा।।

इंतज़ार करता हूं मैं तुम्हारा
लेकिन तू कभी नज़र आता नहीं
क्या कभी होता है तुम्हारे साथ भी
जब वो तुमसे मिलने आता नहीं।।

क्या बीतती है उस वक्त
हमारे ऊपर तू ये जानता नहीं
जबतक खुद पर न बीते
कोई भी दूसरों का दर्द पहचानता नहीं।।

जो सज़ा मिल रही है हमें
है दुआ रब से कि तुमको न मिले
जो चाहता है अपने प्यार से तू
रब करे तुमको वो सबकुछ मिले।।

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Author
कवि एवम विचारक

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