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उड़ा फुर्र से तोता(बाल कविता)

*उड़ा फुर्र से तोता(बाल कविता)*

गुड़िया ने पिंजरे में
प्यारा सुन्दर तोता पाला
खूब शरारत करता था वह
लेकिन भोला – भाला

एक दिवस तोते ने सोचा
बाहर कैसे आऊँ
पिंजरे की डंडी टूटी थी
चाहा इससे जाऊँ

पूरा जोर लगाकर
पहले बाहर चोंच निकाली
उड़ा फुर्र से जाकर बैठा
दूर पेड़ की डाली

गुड़िया ने जब यह देखा
तो ताली खूब बजाई
बोली “आजादी सबका हक
सबको ही यह भाई”
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश,बाजार सर्राफा
रामपुर(उ.प्र.) 9997615451

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