· Reading time: 1 minute

” ————————————– अरमानों का खेला ” !!

थोड़ा सा विश्राम दूं तन को , मन भी लगे थकेला !
काटे से कटते ना दिन है , समय बड़ा अलबेला !!

सज़ धज कर श्रृंगार किया है , बाट जोहती आंखें !
अंतर्मन की चाहत को है , तुमने पल पल ठेला !!

संदेशों से पा जाते हैं , ऊर्जा नई नई सी !
तुम आये तो सज़ जाता है , अरमानों का खेला !!

ताने खूब सुना करते हैं , आँचल कोरा कोरा !
लक्ष्य तुम्हारा लिये सामने , कठिन लगे है बेला !!

सेवा भाव बन्धा है पल्लू , मोल कोइ ना जाने !
कमजोरों को खाने पढ़ते , यहां सदा ही ढेला !!

शिक्षा दीक्षा गांठ बन्धी है , यही काम बस आवे !
चतुर जनों के पास भीड़ है , हम तो रहे अकेला !!

अल्हड़ता खोयी खोयी है , गुमसुम है खुशहाली !
यहां प्रतीक्षित अभी लगे है , परिवर्तन का रेला !!

मुस्कानों के तीर जगाकर , अपनी पीर भुला दूं !
तुम आये तो लग जायेगा , उम्मीदों का मेला !!

1 Comment · 258 Views
Like
Author
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार ,…

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...