· Reading time: 1 minute

“… अब जाने दो “

डॉ लक्ष्मण झा “ परिमल “
===============
हम आज युदा होक तुमसे
पछताते राह पे जाते हैं !
मंजिल को अब जाने दो
छाया भी भागे जाते हैं !!
हम आज युदा होक तुमसे
पछताते राह पे जाते हैं !
मंजिल को अब जाने दो
छाया भी भागे जाते हैं !!

लग रहा आज गिरने वाला है आसमान ,
यह अंधकार जीवन का कब होगा विहान ?
लग रहा आज गिरने वाला है आसमान ,
यह अंधकार जीवन का कब होगा विहान ?

सिर्फ तुम्हारी यादों में
आंसू मेरे वह जाते हैं !
मंजिल को अब जाने दो
छाया भी भागे जाते हैं !!

मैं जिधर देखता आज उधर पतझड़ ही है
अब नयनों के साथी मेरा सिर्फ सावन ही है !
मैं जिधर देखता आज उधर पतझड़ ही है
अब नयनों के साथी मेरा सिर्फ सावन ही है !!

अब कोयल की बोली
गीत विरह के लगते हैं !
मंजिल को अब जाने दो
छाया भी भागे जाते हैं !!
हम आज युदा होक तुमसे
पछताते राह पे जाते हैं !
मंजिल को अब जाने दो
छाया भी भागे जाते हैं !!

==============
डॉ लक्ष्मण झा “ परिमल “
साउन्ड हेल्थ क्लिनिक
एस 0 पी 0 कॉलेज रोड
दुमका ,झारखंड
भारत

13 Views
Like
Author

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...