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30 May 2023 · 1 min read

Gamo ko chhipaye baithe hai,

Gamo ko chhipaye baithe hai,
Taz-poshi se daman chhudaye baithe hai.
Na sikwa hai bulandiya sajane ki,
Na gam hai nakamiyabiyo se har jane ki,
Jb jajba dil ke darak se dimak me surang banata hai,
Tb sbhi kamiyabi sikh deti hai , hausla khud ba khud bante jata hai.
Ashiyane ki mutthi jhukaye baithe hai,
Taz-poshi se daman chhudaye baithe hai.

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