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ग़ज़ल:-पत्थर और पानी

*रविवारीय प्रतियोगिता*
विषय:- पत्थर और पानी
विधा:- ग़ज़ल

ग़ज़ल
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पत्थर और पानी तेरी अजीब कहानी रे,
इक रोके है रस्ता तो दूजा दे जिंदगानी रे।
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झर झर बहते झरने पत्थर के पहाड़ो से,
कल कल छल छल करे दरिया दिवानी रे।
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हरे भरे उपवन,है खिल खिलाते पानी से
लहलहाती कलिया लगती बड़ी सुहानी रे।
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इतना अडिग है पत्थर,पर्वतो-चट्टानो का
डरे न आंधी तुफां से ऐसी उसमे रवानी रे।
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छल,कपट छोड़ सीख ले पत्थर पानी से,
पत्थर दिल इंसान, तूं भी बन जा पानी रे।
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इतना क्या गिरना ‘जैदि’ तेरे इस ज़मीर से,
तूं शजर बन ऐसा तेरी छांव लगे सुहानी रे।
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शायर:-“जैदि”
एल.सी.जैदिया “जैदि”
बीकानेर (राजस्थान)पानी

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Author
मेरा परिचय:- नाम:- एल.सी.जैदिया "जैदि" उपनाम:- "जैदि" जन्म:- 20/11/1969 शिक्षा:- एम.ए. (राजनीतिक विज्ञान) व्यवसाय:- राजकीय सेवा पद:- "वरिष्ठ तकनीकी सहायक" विभाग:- सरदार पटेल मेडिकल कोलेज , बीकानेर राजस्थान। रुची:- (लेखन)…

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