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बेकार बाटे सादगी

बेकार बाटे सादगी
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ना लहर बा आशिकी के ना बचल कवनो खुशी
का कहीं अब हाल आपन खो गइल बा जिंदगी

जे मिले दिलवे दुखावे चोट खाईं रोज हम
अब समझ में आ गइल बेकार बाटे सादगी

हर तरफ बा स्वार्थ के आइल अमावस देखि लऽ
ये अमावस से मगर खोजे के बाटे चाँदनी

बा जहर से भरि गइल भाई इहाँ वातावरन
ये शहर में मिल न पाई गाँव के ऊ ताजगी

कारखाना तू लगावऽ शौक से बाकिर सुनऽ
गंदगी से भरि गइल बा देश के सगरो नदी

का निराशा के भंँवर में डूब के सोचेलऽ तू
जे लगन से लागि जाला खोजि लेला रोशनी

झुंड में ‘आकाश’ चींटी आ चले बकुला मगर
आजकल देखल न चाहे आदमी के आदमी

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 17/07/2021

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संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…

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