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सोहर गीत

मामा घर बजत बधाईया, त पापा घर सोहर हो,
ललना लऊकेला गोल मटोल तऽ दुनो कुल तारन हो।।
ये ललना लऊकेला गोल मटोल तऽ दुनो कुल तारन हो।।

लेईआवहु जाई महरीनियाँ तऽ सुनऽहु गोतीनियाँ नू हो, ललना शुभ-शुभ नार कटवावहु,लाल नहवावहु हो।।

लेईआवहु काठ के पलनवाँ तऽ सुनऽहु सजनवां नू हो,ललना ताहि पर पुत के सुतावहु अउरी झुलावहु हो।।

बाटहु अन, धन, सोनवा तऽ सुन ये पहुनवाँ नू हो, ललना जोर-जोर डुग्गी पिटवावहु बबुआ दुलारहु हो।।

आवहु बाबा अउरी दादी तऽ नाना अउरी नानी नू हो ललना खुशी होई देहु अशीष बरीस लाख जीयहु हो।।

✍️पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’
मुसहरवा (मंशानगर)
पश्चिमी चम्पारण, बिहार

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Author
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है। Books: कुसुमलता (अभिलाषा नादान की)…

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