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साम्प्रदायिक राजनीति

अबकी बार
तू लेले बाड़अ
ग़लत लोग से पंगा…
(१)
संभल जा ना तअ
दउड़े के पड़ी
होके तहरा नंगा…
(१)
उलटा तहके
लटकई हअ सन
डाल के गोड़ में फंदा…
(२)
इहवां पर तू
निकल ना पईबअ
कराके कवनो दंगा…
(३)
बंद करावअ
अपने देश में
लूट-मार के धंधा…
(४)
अब ना चली
जात-धरम के
खेल ई तहार गंदा…
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra

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Lyricist, Journalist, Social Activist

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