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विजया के शादी

केहू त पिटवा द गाँव भर मुनादी।
विजया बेचारा बलभर दुआ दी।
कवनो अगुआ कुछ कऽ नाही पवलें
एहू साल भएल न विजया के शादी।
-सिद्धार्थ

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी

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