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लोक नृत्य आधारित

मचल बाटे करमा के, धूम सजी ओरिया, सुनऽ ये सखी।
सङ्गे-सङ्गे नाचत पंवड़िया, सुनऽ ये सखी।

हरखू नचावतारे, देखऽ कठ-घोड़वा।
घूमि-घूमि नाचे जइसे, नाचताटे मोरवा।
बुधनी मगन नाचे-२ माथ लेई झिझिया, सुनऽ ये सखी।
सङ्गे-सङ्गे नाचत पंवड़िया, सुनऽ ये सखी।

करिया- झूमर के जी धूम मचल बा।
नच- देखवयीयन के हियरा जचल बा।
नाच लवंड़ा में-२ मस्त देखवयीया, सुनऽ ये सखी।
सङ्गे-सङ्गे नाचत पंवड़िया, सुनऽ ये सखी।

बरसे ला बदरा तऽ कजरी चलेला।
गइलऽ बरात घरे डोमकच ठनेला।
भउजी बनल बाड़ी-२ आज देऽ भइया, सुनऽ ये सखी।
सङ्गे-सङ्गे नाचत पंवड़िया, सुनऽ ये सखी।

होलिया में रङ्ग – गुलाल उड़ेला।
ढोलक झालऽ पे गोड थिरकेला।
मस्त- मगन होई-२ नाचे सब जोगिया, सुनऽ ये सखी।
सङ्गे-सङ्गे नाचत पंवड़िया, सुनऽ ये सखी।

✍️पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’
मुसहरवा (मंशानगर)
पश्चिमी चम्पारण
बिहार

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Author
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है। Books: कुसुमलता (अभिलाषा नादान की)…

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