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लकीर के फ़क़ीर

भोजपुरी के साम्राज्य में
एक कण मात्र बाड़ऽ,
तोर बोली में विष के
मिलान कईसे भईल,
कभी बजेलऽ सुर के
सात स्वर में तू,
राग में कर्कश बखान
कईसे भइल,
का मिलल भिखारी के
पगड़ी उतार के,
महेंद्र मिसिर के संस्कार में
भुलान कईसे भईल,
शारदा सिन्हा के लोरी में
का कमी रहे,
कल्पना भरत के ज्ञान के
अनाचार कईसे भईल,
लकीर के फ़क़ीर काहे
बनल बाड़ऽ राजा,
तहरा नियन क़ेतना आइल
आ क़ेतना चली गईल।।

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हम लेखक तो मनमौजी हैं पर फूल और अंगार दोनों लिखने की कुव्वत रखते हैं।

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