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रंगे सियार रहल घाघ सभै

पइसा भी गइल परधानी मा
अर इज्जत भी गइल पानी मा

रंगे सियार रहल घाघ सभै
इहि राजेनीति कहानी मा

अपरे ही विकास करल नेता
रंग चढ़े का चुनर धानी मा

जो बरबाद हुए चाही वहि
चोर बने इस रजधानी मा

नेतागिरि अइसन छोरी बा
नास करल अपने जवानी मा

•••

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…

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