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मुक्तक

एगो मुक्तक-
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आज ना होखे भले ऊॅंचा महल सब के।
मिले सुख चैन मड़ई में रहे कुछ बाति ऊ तब के।
भइल सपना पुरनका दिन कइल संतोष हर बाती,
रहल परिवार की बीचे न अइसन बाति बा अब के।

**माया शर्मा,पंचदेवरी,गोपालगंज(बिहार)

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