· Reading time: 1 minute

माई के ललनवा

बम चले गोली चले, उहँवा न बोली चले,
सीमवा प सीना तानि, खाडा बा जवनवा।

दुसमन वार करे, कोशिश हजार करे,
लजिया बचावऽ ताते, माई के ललनवा।

हर घड़ी हर छण, खाडा रहे दिन भर,
रहे चउकना देखऽ, सांझो रे विहनवा।

भारत माई क शेरऽ, करे ना तनिक देरऽ,
हँसत हँसत देला, सीम प परनवा।

(स्वरचित मौलिक)
#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’
तुर्कपट्टी, देवरिया, (उ.प्र.)
☎️7379598464

79 Views
Like

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...