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मजूरा किसान

शक्ति छन्द–(मजूरा किसान)
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रवाइल सजी धान अब खेत में।
कथी बा किसानन बदे नेत में।।
बतायीं तनीं आजु भगवान जी।
बनावल बिगाड़ल करीले सजी।।१।।

भरोसा जता के किसानी करीं।
त घामें बतासे जरीं आ मरीं।।
न सुबहित मिले दाल रोटी कबो।
किसानी न छोड़ीं कबो हम तबो।।२।।

बढ़ल आज कीमत सजी चीज के।
खुशी कुल हेराइल परब तीज के।।
चुकल ना तगादा पुरनका अबे।
करज के गरज आजु आइल तबे।।३।।

दिवाली मनाई सभे चाव से।
गरीबी मुवाई दिहल घाव से।।
न गोधन कुटाइल कि चालू लगन।
दहेजे बिना बर मिले ना हमन।।४।।

खियाइल पनहिया घुमत दर-ब-दर।
करीं का बतायीं मिले घर न बर।।
कुॅंवारे रही आज बेटी अरे।
इहे बा लिखल अब मजूरा घरे।।५।।

**माया शर्मा, पंचदेवरी, गोपालगंज (बिहार)**

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