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भोजपुरी सवैया छंद

#दुर्मिल सवैया छंद
24 वर्ण। 8 सगण। मापनी-
112 112 112 112 112 112 112 112
घनघोर घटा गरजे बरसे, बिजुरी चमके सखि पावस मे़।
बदरा बरसे तब नेह जगे, सजनी गमके सखि पावस मे़।
चढ़ते अदरा बरसे बदरा, चपला दमके सखि पावस मे़।
परदेश बसे सजना जिनके, घर आ धमके सखि पावस मे़।।

#कुंतलता_सवैया
26 वर्ण। 8 सगण और लल। मापनी-
112 112 112 112 112 112 112 112 11
वन मोर नचे घन शोर करें, जब चातक दादुर गीत सुनावत।
छिछली तटिनी उतराइ बहे, पावस नभ से जलथार गिरावत।
सखियां सब झूलत बागन में, झुलुआ सजना मुसकाय झुलावत।
जब सर्द समीर लगे तन में, सजनी तन में रति काम जगावत।।

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Author
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है। Books: कुसुमलता (अभिलाषा नादान की)…

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