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भेदभाव एतना बा…

भेदभाव एतना बा…
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दुख में डूबल बाटे कहीं पर जिनिगी त,
कहीं सुखवे के बस बरसे बदरिया।

कहीं भर पेट नाहीं भोजन मिलत हवे,
कहीं मदिरा के छलकत बा गगरिया।

भेदभाव एतना बा मनई आ मनई में,
प्लेन से चले त केहू पैदले डगरिया।

बाकी जन्म आ मरन एक ही समान होला,
कबो तू घमंड के ना जइहऽ पँजरिया।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- ०८/०७/२०२१

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संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…

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