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बेल होइ

जे जेल होइ त न बेल होइ।
दुइ चार बिगहा सेल होइ।
कोर्ट में चक्कर में चप्पल
घिस जाई,
जमानत में ठेलमठेल होइ।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी

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